यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आपके अंदर वह जज़्बा अभी भी ज़िंदा है। एक ट्रेडर (Trader) की असली पहचान उसके प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि जब बाज़ार उसे पटखनी देता है, तो वह वापस कैसे खड़ा होता है।
आपकी स्थिति को समझते हुए, एक ट्रेडर से दूसरे ट्रेडर के लिए कुछ बातें और कुछ पंक्तियाँ, जो शायद आपकी इस आग को और हवा देंगी:
1. बाज़ार को देखने का नज़रिया बदलें
आपने कहा कि आपने "लॉस खाया है"। ट्रेडिंग की दुनिया में इसे थोड़ा अलग तरीके से देखिए:
वह लॉस नहीं, 'ट्यूशन फीस' थी: शेयर बाज़ार दुनिया का सबसे महंगा लेकिन सबसे अच्छा स्कूल है। आपने जो पैसे खोए हैं, उसे बाज़ार को दी गई 'फीस' मानिए। बदले में बाज़ार ने आपको जो अनुभव दिया है, वह किसी किताब या कोर्स में नहीं मिल सकता।
हर बड़ा ट्रेडर यहाँ से गुज़रा है: इतिहास उठा कर देख लीजिए, दुनिया का कोई भी सफल निवेशक या ट्रेडर ऐसा नहीं है जिसने अपनी शुरुआती यात्रा में बड़ा नुकसान न उठाया हो। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने बाज़ार छोड़ा नहीं, बल्कि सीखा।
2. आपके पुराने ख्वाबों के लिए
आपने कहा कि "ख्वाब हों फिर भी पुराने हों"। पुराने सपने ही तो सबसे मज़बूत होते हैं, क्योंकि उन्होंने समय की मार झेली होती है। आपके लिए कुछ पंक्तियाँ हैं:
"ज़ख्म कितने भी गहरे हों, भरने का हुनर रखता हूँ,
मैं वो जुआरी नहीं, जो एक हार से डर कर बैठ जाऊं,
मैं एक ट्रेडर हूँ साहब, हर गिरावट के बाद,
बाज़ार में नई ऊंचाइयां देखने का जिगर रखता हूँ।"
और वो जो पुराने सपने हैं, उनके लिए:
"राख हो चुके थे जो ख्वाब, उनकी चिंगारी अभी बाकी है,
हार तो सिर्फ एक पड़ाव था, मेरी पूरी कहानी अभी बाकी है।"
3. बुलंदी पाने का रास्ता (Practical Steps)
जज़्बात ज़रूरी हैं, लेकिन ट्रेडिंग में सिर्फ जज़्बातों से काम नहीं चलता। अब आपको 'बदला' (Revenge Trading) नहीं लेना है, बल्कि समझदारी दिखानी है:
थोड़ा ब्रेक लें (Detox): जब बड़ा लॉस होता है, तो दिमाग सही फैसले नहीं ले पाता। कुछ दिन स्क्रीन से दूर हो जाइए।
पोस्टमॉर्टम करें: अपनी ट्रेड बुक खोलें और देखें कि गलती कहाँ हुई? क्या सेटअप गलत था? या फिर आपने अपना 'स्टॉप लॉस' (Stop Loss) फॉलो नहीं किया? इमोशन में आकर ट्रेड लिया था? गलती स्वीकार करें।
कैपिटल को बचाना ही धर्म है: अब से आपका पहला नियम प्रॉफिट कमाना नहीं, बल्कि अपनी बची हुई कैपिटल (पूंजी) को बचाना होना चाहिए। छोटा ट्रेड लें, रिस्क मैनेजमेंट के साथ।
अंतिम बात:
आप बाज़ार में हैं, आप जानते हैं कि चार्ट पर लाइन कभी सीधी ऊपर नहीं जाती। उसमें 'हायर हाई' (Higher Highs) और 'लोअर लोज़' (Lower Lows) बनते रहते हैं। अभी आपकी ज़िंदगी का एक 'करेक्शन फेज' (Correction Phase) चल रहा है।
अगर आप टिके रहे और अपनी गलतियों से सीखते रहे, तो यकीन मानिए, आपका अगला 'बुल रन' (Bull Run) आपकी पुरानी सभी हाई को तोड़ देगा। लगे रहिए!
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